शिक्षक भर्ती या छलाबा!
जब मैं छोटा था, तब मेरी मां छलावे के बारे में अकसर चर्चा करती थीं कि छलावा कोइ सा भी रुप धारण कर लेता है। किसी को भी अपने जाल में फंसा लेता है। परिषदीय स्कूलों में 72 हजार शिक्षकों की भर्ती प्रकि्रया को देखकर मेरे बचपन की यादें ताजा हो गइ हैं। क्योंकि शिक्षक भर्ती प्रकिया ने प्रदेश भर के करीब 8 लाख आवेदनकर्ताओं को अपनी जद में ले लिया है। यह भर्ती प्रकि्रया भी छलावे का पूरा-पूरा अहसास करा रही है। वर्ष-2011 से अब तक आवेदनकर्ताओं को छला जा रहा है। फिलहाल, माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने भर्ती प्र्रिक्रया पर रोक लगाकर जहां आवेदनकर्ताओं को बड़ा झटका दिया है। वहीं, शिक्षा विभाग में सकि्रय दलालों की मोटी कमार्इ पर भी अड़ंगा लगा दिया है। अभी तक प्रति आवेदनकर्ताओं के करीब 1500 से 5000 हजार रुपये तक बीच भंवर में फंसा चुके हैं, जिससे प्रदेश भर के बेराजगारों के करीब 3 अरब रुपये प्रदेश सरकार की झोली में पहुंच चुके हैं। एक ओर जहां लाखों आवेदनकर्ता नौकरी की बाट जोह रहे हैं। वहीं, प्रदेश भर के लाखों नौनिहालों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। आखिर बिना शिक्षकों के नौनिहालों का भविष्य कैसे सुधर सकता है। आज आलम यह है कि संभल, मउ, चंदौली, महाराजगंज, जालौल, फैजाबाद, अमरोहा, औरया, उरर्इ, महौवा जैसे जनपदों में कर्इ हजार विधालय बंद होने की कगार पर हैं या फिर एक शिक्षक के सहारे चल रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर लखनउ, आगरा, नोएडा, कानपुर, गाजियाबाद जैसे जनपदों में शिक्षकों की भरमार है। अनगिनत विधालय ऐसे भी हैं जहां बालक-बालिकाओं की संख्या बहुत ही कम है, लेकिन शिक्षकों की संख्या अपेक्षा से ज्यादा है। यह कहना गलत नहीं होगा कि इसके लिए सरकार जिम्मेदार है। सरकार को चाहिए की शिक्षक भर्ती प्रकि्रया को गंभीरता से ले और बेरोजगार प्रशिक्षितों को जल्द से जल्द नौकरी दे, ताकि स्कूलों की दशा को सुधारा जा सके। सरकार स्वयं कोर्ट की शरण ले और लाखों बेरोजगारों व नौनिहालों के भविष्य को ध्यान में रखकर इस प्रंि्रक्रया को आगे बढ़ाने मेें साकारात्मक सोच बनाए।
उस्मान सैफी
